जीवन और संघर्ष
जागरण की प्रथम किरण से
संध्या की अंतिम छाया तक,
मैं चलता हूँ एक पथ पर
जो संघर्षों से भरा है,
हर कदम पर
आकांक्षाओं का बोझ,
आशाओं का संघर्ष,
और सपनों की धुंधली रेखा।
जीवन बन गया है
एक निरंतर दौड़,
जहाँ लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए
छूट जाते हैं आनंद के क्षण,
संगति के मधुर पल,
और मन की शांति।
हर दिन की शुरुआत
एक नयी चुनौती का संकेत देती है,
हर रात्रि की चादर
थकावट और असमंजस से ढकी होती है,
फिर भी,
इस अंतहीन दौड़ में
कोई ठहराव नहीं,
कोई विश्राम नहीं।
स्वप्नों की ऊँचाई तक पहुँचने की चाह
हर दिन मुझे जगाती है,
परंतु हर नए दिन के साथ
बढ़ जाता है संघर्ष का भार,
कभी-कभी तो लगता है
जैसे यह राह,
जिस पर मैं चल रहा हूँ,
कभी समाप्त नहीं होगी।
कभी मैं ठहरता हूँ,
एक पल के लिए,
सोचता हूँ कि क्या यह सब
सार्थक है?
क्या इस अंतहीन यात्रा का
कोई उद्देश्य है?
या यह मात्र एक भ्रम है,
जिसमें मैं खो गया हूँ?
परंतु फिर भी,
आशाओं की किरण
मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है,
संघर्षों की लहरें
मुझे जीवन के गहरे अर्थ से परिचित कराती हैं,
और मैं जानता हूँ
कि इस जीवन का संघर्ष
मेरा स्वयं का निर्माण कर रहा है।
इस संघर्षमय जीवन में
कभी संताप, कभी उत्साह,
कभी निराशा, कभी उत्सव,
सब कुछ समाहित है,
और इसी में
मैं खोजता हूँ
अपने अस्तित्व का अर्थ,
अपने सपनों की मंजिल।
संघर्षों से भरा यह पथ,
कभी मुझे तोड़ता है,
कभी मुझे गढ़ता है,
परंतु अंत में,
यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी कथा बन जाता है,
जिसमें हर अध्याय
संघर्षों से लिखी हुई
एक अमिट गाथा है।
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