शायद
हां ! शायद
आज तुम
जीत जाओगे ये जंग
और हार जायेगी ये इंसानियत
पर उसके बाद
तुम्हारी आने वाली नस्लों के हिस्से में क्या आयेगा ?
तुम्हारी अपनी ही नस्लें
जब तुम्हारी तवारीखें पढ़ेंगी
और देखेंगी तुमको हिक़ारत से
या फिर शर्म करेंगी
तुम पर
और फिर मांगेंगी माफियां
ठीक वैसे ही जैसे सैकड़ों सालों तक
राज करने वालों की नस्लों ने मांगी
उस दिन
हार जाओगे तुम
और जीत जायेगी इंसानियत
- जमशेद
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