तुम्हारे बाद
तुम्हारे बाद
मैं लिखूंगा असंख्य कविताएं
पर उनमें
रस नहीं होगा ,
न लय,
न अलंकार ,
न ध्वनि ,
न वक्रोक्ति,
न शिल्प
और नहीं उसका कोई औचित्य
इन कविताओं में होगा
विसंगति ,
संत्रास ,
संताप ,
विद्रूपताएं ,
उत्कट विप्लव
और यह विरह विमर्दित की स्थिति
जो एक दिन
इस दुर्दांत अंतर्द्वंद्व का
उन्मूलन कर देगा
और छीन लेगा
मेरी जिजीविषा
और उस दिन
मैं बढ़ जाऊंगा
निगति की ओर
इस औदात्य ,
उदान्त,
और अभिधान को
खत्म करते हुए ..
- जमशेद
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