मैं आजकल
हर रोज हार जाता हूँ
अंतर्द्वंद्व के युद्ध में
क्योंकि मान लेता हूं
सब का कारण मैं हूँ
और इस हार के बाद
हो जाता हूँ इतना कमतर
कि डर जाता हूँ
खुद से !
और क्षीण हो जाती हैं
मेरे अंदर निहित सारी शक्तियां
और बढ़ जाता हूँ
खुद को समाप्त करने
पर याद आ जाती है
कुछ चेहरें
और थोड़ी जिम्मेदारियाँ ।।
-जमशेद
Comments